भदोही की कालीन ने बढ़ाई UP की शान, नई संसद में लगी कालीन से वैश्विक बाजार में बढ़ी पहचान: CM Yogi
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर सभी बुनकरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कृषि के बाद वस्त्र उद्योग सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है, और उत्तर प्रदेश में हथकरघा व पावरलूम से करीब 30 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भदोही की कालीन, जो 2017 से पहले मृतप्राय थी, आज दुनिया भर के बाजारों में सैकड़ों करोड़ रुपये का निर्यात कर रही है। देश की नई संसद में भी भदोही की कालीन का लगना इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
सरकारी प्रयासों से 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को विद्युत सुविधा के रूप में 109 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने हथकरघा उत्पादों को डिजाइन, तकनीक, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से वैश्विक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को उपहार के रूप में देने की भी अपील की। यह उद्योग ढाई लाख परिवारों, यानी लगभग 14-15 लाख लोगों की आजीविका का आधार है, और पावरलूम को शामिल करने पर यह संख्या 30 लाख से अधिक हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में, हमें समय और मांग के अनुरूप डिजाइन और वस्त्र तैयार करने होंगे। दुनिया भर में उत्पादों की मांग को देखते हुए यह हमारे लिए एक सुनहरा अवसर है। लखनऊ, गोरखपुर, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर जैसे क्षेत्र अपने उत्कृष्ट हस्तशिल्प के लिए जाने जाते हैं। प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों, कारीगरों और उद्यमियों के उत्थान के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी है। भदोही में केंद्र सरकार की मदद से कालीन का एक्सपो सेंटर और वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी में फैसिलिटेशन सेंटर से जुड़े छात्रों को स्कॉलरशिप दी जा रही है, जिससे वे डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी और पैकेजिंग का अध्ययन कर सकें। टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती देने के लिए लखनऊ में 1000 एकड़ में पीएम मित्र पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा, संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना का कार्य भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने पिछली सरकारों पर विजन की कमी और वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 से पहले बिजली और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाएं भी बदहाल थीं और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हथकरघा के क्षेत्र में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं, जो एक अद्भुत प्रगति है। प्रधानमंत्री मोदी भी विदेशी दौरों पर उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प उत्पादों को विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप प्रदान करते हैं, जो सभी हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी थी।
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