बिहार पंचायत चुनाव 2026: ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ का पालन अनिवार्य
बिहार में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का मसला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पिछले नगर निकाय चुनावों की तरह ही इस बार भी ओबीसी आरक्षण को लेकर पेच फंसने की आशंका है, यदि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ के मानदंडों का पालन नहीं करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनावों में अभी पर्याप्त समय है, ऐसे में सरकार समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘के. कृष्णामूर्ति बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक वैधता प्रदान करने के लिए तीन अनिवार्य शर्तों का एक फार्मूला तय किया है, जिसे ‘ट्रिपल टेस्ट’ कहा जाता है। इसके तहत किसी भी राज्य सरकार को ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले इन तीन शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, त्रिस्तरीय जांच प्रक्रिया को पूर्ण कराने के लिए राज्य सरकार को सर्वप्रथम एक स्वतंत्र आयोग का गठन करना होगा। इस आयोग का कार्य स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक भागीदारी और उनके सामाजिक-शैक्षिक पिछड़ेपन का विस्तृत अध्ययन करना होगा। यह आयोग विशेष रूप से स्थानीय निकायों के लिए ही डेटा एकत्र करेगा, जिसमें गांव-गांव और पंचायत स्तर पर वास्तविक ओबीसी आबादी, उनकी शिक्षा, सामाजिक स्थिति और अब तक मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व का गहन विश्लेषण शामिल होगा।
त्रिस्तरीय जांच का दूसरा चरण आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपना है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेखित होगा कि किस पंचायत में ओबीसी की कितनी आबादी है, उनका प्रतिनिधित्व किस स्तर पर कितना है, और किस स्तर पर कितना आरक्षण देना उचित होगा। इसमें वार्ड स्तर, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, प्रमुख, जिला परिषद सदस्य एवं जिलाध्यक्ष जैसे पदों पर ओबीसी के लिए कितने पदों को आरक्षित किया जाना चाहिए, इसका विस्तृत विवरण होगा।
सुप्रीम कोर्ट की तीसरी और अंतिम शर्त यह है कि किसी भी स्थानीय निकाय में आरक्षण की कुल सीमा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी का आरक्षण शामिल है, किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। बिहार में यह प्रविधान पहले से ही लागू है। पिछले नगर निकाय चुनावों के दौरान भी इसी तर्क के आधार पर अंतिम समय में राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर त्रिस्तरीय जांच की प्रक्रिया पूरी करानी पड़ी थी, ताकि ओबीसी आरक्षण लागू किया जा सके। पंचायत चुनावों में भी इसी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
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