लखनऊ में Ayushman Yojana Scam: जरूरत से ज्यादा दिन ICU में रखे मरीज, 8 अस्पतालों पर जांच
लखनऊ के आठ निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इन अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने मरीजों को जरूरत से ज्यादा दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा ताकि योजना के तहत मिलने वाले पैकेज का लाभ उठाया जा सके। स्टेट हेल्थ एजेंसी (सांचीज) ने जांच में पाया कि कई मरीजों को केवल दो से तीन दिन आईसीयू की जरूरत थी, लेकिन उन्हें पांच से आठ दिन तक भर्ती रखा गया।
फर्जीवाड़े का तरीका और बिलिंग
आयुष्मान योजना के तहत सरकार ने प्रत्येक बीमारी के लिए पैकेज तय किए हैं। आईसीयू वेंटिलेटर बेड के लिए प्रतिदिन 9900 रुपये और बिना वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड के लिए 9350 रुपये प्रतिदिन का भुगतान निर्धारित है। जांच में सामने आया कि इन अस्पतालों ने आईसीयू और वेंटिलेटर बेड को ज्यादातर समय फुल दिखाया। कई मामलों में तो बेड की संख्या से अधिक मरीजों को भर्ती दिखाया गया। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह थी कि बिना जरूरत के मरीजों को आईसीयू में रखकर बिल बढ़ाया गया।
अधूरे दस्तावेजों से भुगतान की कोशिश
सांचीज के अधिकारियों के अनुसार, कई बीमारियों में मरीज को एक या दो दिन ही आईसीयू में रखने की जरूरत होती है। हालांकि, मरीज को ज्यादा या कम दिन आईसीयू में रखा जा सकता है, लेकिन इसके लिए जांच रिपोर्ट, दवाएं और अन्य जरूरी दस्तावेज होने चाहिए। इन आठ अस्पतालों ने आईसीयू में मरीजों को भर्ती तो दिखाया, लेकिन बिल भुगतान के समय जांच रिपोर्ट और समरी रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश नहीं किए। निजी अस्पतालों ने अधूरे दस्तावेजों के सहारे भुगतान प्राप्त करने की साजिश रची थी।
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एनबी सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की मनमानी और गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आयुष्मान योजना के नोडल डॉ. विनय मिश्र को एक हफ्ते के भीतर सभी आठ अस्पतालों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
