कैंसर संस्थान से एक और डॉक्टर का इस्तीफा, न्यूरो सर्जरी मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें | UP News
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान एक बार फिर डॉक्टरों के पलायन के कारण चर्चा में है। संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग से एक और विशेषज्ञ डॉक्टर के इस्तीफा देने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यह घटना संस्थान में डॉक्टरों की लगातार घटती संख्या और इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को उजागर करती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का मरीजों पर असर
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन कैंसर और अन्य जटिल न्यूरो संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को समय पर सर्जरी और उचित इलाज की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को अपॉइंटमेंट मिलने में देरी हो रही है, जिससे बीमारी बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को इलाज की आस में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
वेतन विसंगति बनी प्रमुख वजह
सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों के संस्थान छोड़ने का एक प्रमुख कारण वेतन और भत्तों में असमानता है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी योग्यता अन्य बड़े संस्थानों जैसे केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान के विशेषज्ञों के बराबर है, लेकिन उन्हें मिलने वाले वेतन और भत्तों में काफी अंतर है। इसी असंतोष के चलते कई विशेषज्ञ डॉक्टर संस्थान छोड़ रहे हैं। अब तक 28 से अधिक डॉक्टर संस्थान छोड़ चुके हैं और कई अन्य के जाने की तैयारी में हैं।
संस्थान प्रशासन के सामने चुनौती
लगातार हो रहे डॉक्टरों के पलायन से संस्थान की कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अब संस्थान प्रशासन के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह विशेषज्ञ डॉक्टरों को कैसे रोके और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा कैसे उपलब्ध कराए। डॉक्टरों की कमी को पूरा करना और स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाना संस्थान की प्राथमिकता बन गई है।
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