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मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बढ़ा रहा सिरदर्द और माइग्रेन का खतरा: न्यूरोलॉजिस्ट ने दी बचाव की सलाह

By Aug 14, 2026

मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर घंटों वीडियो देखने और अत्यधिक तनाव से सिरदर्द की समस्या गंभीर होती जा रही है, जिससे बच्चे और युवा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। हाल के वर्षों में माइग्रेन के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है, जिसके लिए लोग अक्सर दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रिवेंटिव थेरेपी माइग्रेन के दर्द को नियंत्रित करने में काफी प्रभावी साबित हो सकती है।

न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर विशेषज्ञ सलाह

एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की न्यूरोफिजिशियन डॉ. आकांक्षी अग्रवाल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ब्रेन स्ट्रोक, पैरालाइसिस, न्यूरोपैथी, और गर्दन व रीढ़ की हड्डी के दर्द से संबंधित सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि अत्यधिक मोबाइल उपयोग, तनाव, नींद की कमी और उच्च रक्तचाप सिरदर्द के प्रमुख कारण हैं। मोबाइल के बजाय टीवी देखने, योग और व्यायाम को अपनाने की सलाह दी गई। यदि सिरदर्द बना रहता है, तो सीटी स्कैन जैसे परीक्षणों से अन्य कारणों का पता लगाया जा सकता है।

ब्रेन स्ट्रोक और न्यूरोपैथी

ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से के कार्य करने में बाधा आती है, जिससे सुन्नपन और शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके इलाज में दवाओं के साथ फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण है। न्यूरोपैथी के लक्षणों का पता जांच से लगाया जाता है और इसका इलाज संभव है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, शराब और धूम्रपान ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं। स्ट्रोक के चार घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने पर विशेष इंजेक्शन से रक्त के थक्के को खोला जा सकता है।

माइग्रेन और मिर्गी का प्रबंधन

माइग्रेन के लिए प्रिवेंटिव थेरेपी काफी राहत दे सकती है, साथ ही इसके कारणों से बचाव आवश्यक है। मिर्गी के दौरे के लिए ईईजी जांच और क्लिनिकल मूल्यांकन के बाद इलाज से अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं। मिर्गी से पीड़ित महिलाएं सामान्य जीवन जी सकती हैं और गर्भधारण भी कर सकती हैं। मायस्थेनिया ग्रेविस और पार्किंसंस जैसी अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रबंधन पर भी चर्चा की गई।

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