प्राकृतिक खेती: मिट्टी, जल और मानव स्वास्थ्य के लिए एक वरदान – Aligarh News
अलीगढ़ में नमामि गंगे परियोजना के तहत एक किसान मेले और प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहाँ वैज्ञानिकों ने जैविक और गौ-आधारित खेती को अपनाने का संदेश दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मिट्टी, जल और मानव स्वास्थ्य को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचाना है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और कम्पोस्ट व जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि जीवामृत जैसे प्राकृतिक संसाधन पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिससे मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ती है और उत्पादन लागत भी कम होती है।
जल संरक्षण पर विशेष बल देते हुए, नदियों के संरक्षण और रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग जैसी प्रणालियों को अपनाने का आह्वान किया गया। किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने, कम पानी वाली फसलों का चयन करने और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग न्यूनतम करने की सलाह दी गई। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।
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