एडीए को 25 साल बाद लौटाने पड़े 6.89 लाख, नक्शे पर आपत्ति लगाकर हुई थी 84 हजार की अवैध वसूली
आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को एक भवन स्वामी को 25 साल बाद ब्याज सहित 6.89 लाख रुपये लौटाने पड़े हैं। यह मामला नक्शा पास कराने के नाम पर की गई अवैध वसूली से जुड़ा है। मंजू कंसल नामक महिला से एडीए ने नक्शा पास करने की आपत्ति के बदले 84,839 रुपये वसूले थे, जो बाद में भारी पड़ गए।
उपभोक्ता आयोग ने वर्ष 2002 में ही पीड़िता के पक्ष में आदेश दिया था, लेकिन एडीए की अपील के बाद मामला लंबा खिंच गया। अंततः, एडीए को उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन करते हुए न केवल वसूली गई राशि बल्कि उस पर लगा ब्याज भी देना पड़ा।
यह घटना आम नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि सरकारी विभागों द्वारा की गई अवैध वसूली के खिलाफ न्याय पाने के लिए उपभोक्ता फोरम एक प्रभावी माध्यम है। प्राधिकरणों को अपनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए ताकि ऐसे मामले दोबारा न हों।
मामले की पृष्ठभूमि में, मंजू कंसल ने 1998 में एक प्लॉट खरीदा था और उस पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराने हेतु आवेदन किया था। आरोप है कि एडीए ने 90 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की और बाद में अवैध रूप से पैसे वसूले। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दायर किया, जिसने अंततः एडीए को दोषी पाया।
