भावनात्मक बुद्धिमत्ता: सफलता की कुंजी, नेतृत्व और जीवन में संतुलन
उत्तम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में बुधवार को एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय ‘उत्कृष्टता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और संबंध संतुलन के साथ जीवन संभालने में नेताओं की चुनौतियां’ था। इस कार्यक्रम का उद्घाटन चेयरमैन संजीव कुमार सिंह ने किया, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑफ डेवलपमेंट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. नागेन्द्र पी. सिंह उपस्थित थे।
डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में आज के जटिल और अनिश्चित परिवेश में भावनात्मक बुद्धिमत्ता की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्व-जागरूकता, स्व-प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता और संबंध प्रबंधन जैसे भावनात्मक कौशल भी सफल नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मजबूत रिश्ते और भावनात्मक संतुलन ही उत्कृष्टता का आधार हैं।
सेमिनार में वक्ताओं ने कार्य-व्यक्तिगत जीवन संतुलन बनाए रखने, तनाव प्रबंधन करने और टीम को प्रेरित करने के व्यावहारिक तरीकों पर भी चर्चा की। डॉ. सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे भावनात्मक कौशल का विकास करके व्यक्ति अपने जीवन और कार्यशैली में सुधार ला सकता है।
चेयरमैन संजीव कुमार सिंह ने इस प्रकार के आयोजन को आज के समय में ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे सेमिनार युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करते हैं।
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुकेश कुलश्रेष्ठ ने किया। को-चेयरमैन सुबोध कुमार सिंह, धीरज सिंह और प्राचार्य डॉ. नीरज जैन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सूत्रों के अनुसार, इस सेमिनार का उद्देश्य प्रतिभागियों को भावनात्मक बुद्धिमत्ता के महत्व के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में बेहतर निर्णय ले सकें और सफल हो सकें।
