गाजियाबाद में हजारों फर्जी मतदाताओं पर गिरी गाज, सूची से नाम हटाए गए
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में, गाजियाबाद जिले की 142 ग्राम पंचायतों में मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई है। इस अभियान के तहत कुल 7,233 ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिनके नाम, पिता का नाम और उम्र जैसी जानकारियां समान थीं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूचियों के सत्यापन का कार्य चलाया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान, जिले की मतदाता सूची में संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं की संख्या 92,680 पाई गई थी। इसके बाद, बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को इन संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई। सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए बीएलओ को आधार कार्ड नंबर के अंतिम चार अंकों को प्राप्त करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके आधार पर मिलान किया जाना था।
अब तक किए गए सत्यापन में 83.12 प्रतिशत संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं की जांच पूरी हो चुकी है। इस जांच में 7,233 मतदाताओं को डुप्लीकेट पाया गया, जो कुल मतदाताओं का लगभग 7.80 प्रतिशत है। शेष 16.88 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन कार्य भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद डुप्लीकेट मतदाताओं की अंतिम संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से मतदाताओं को संभावित डुप्लीकेट के रूप में वर्गीकृत किया गया था, क्योंकि उनकी व्यक्तिगत जानकारियां काफी हद तक समान थीं। हालांकि, घर-घर जाकर किए गए सत्यापन ने इनकी डुप्लीकेसी की पुष्टि की। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम को मतदाता सूची से हटा दिया गया है ताकि एक व्यक्ति एक ही वोट डाल सके। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य मतदाता सूची को त्रुटि रहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को रोका जा सके और परिणाम पूरी तरह से जनता के निर्णय को दर्शाए।
