गाजियाबाद: वकील से मारपीट मामले में 10 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने का आदेश
गाजियाबाद में वकीलों के साथ पुलिस द्वारा मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लोनी थाने में एक अधिवक्ता के साथ हुई बर्बरता के संबंध में स्थानीय अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए तत्कालीन चौकी प्रभारी गुलाब वाटिका सहित दस पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इस आदेश में एसीपी अंकुर विहार भास्कर वर्मा का नाम भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, अधिवक्ता नितिन का आरोप है कि सात जुलाई 2024 को वह दो पक्षों के बीच चल रहे झगड़े में अपने मुवक्किल की पैरवी करने लोनी थाने पहुंचे थे। आरोप है कि थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने न केवल उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और मारपीट की, बल्कि उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया और कुछ पैसे भी लूट लिए। इतना ही नहीं, अधिवक्ता का यह भी कहना है कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कर दी, जिसके कारण उन्हें जमानत करानी पड़ी।
इस घटना के बाद अधिवक्ता नितिन ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई थी। प्रारंभिक जांच के दौरान चौकी प्रभारी गुलाब वाटिका को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन अन्य पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से अधिवक्ता असंतुष्ट थे। इसके बाद, नितिन ने अपने आवेदन में 10 पुलिसकर्मियों को नामजद करते हुए अदालत से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐश्वर्या प्रताप सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्कालीन चौकी प्रभारी गुलाब वाटिका, विकास सिंह, उपनिरीक्षक नरेश कुमार, अनिल कुमार, अंकुश तोमर, सिपाही सचिन कुमार राठी, थाना प्रभारी लोनी बॉर्डर कृष्ण कुमार मौर्य, उप निरीक्षक वीरेंद्र कुमार मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी लोनी और एसीपी अंकुर विहार भास्कर वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
इस घटना के विरोध में स्थानीय बार एसोसिएशन ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि यदि पुलिसकर्मी ही कानून तोड़ने लगेंगे तो आम आदमी का न्याय पर से विश्वास उठ जाएगा। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह मामला कानून के रखवालों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
