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बरेली की रामायण वाटिका: आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र, बीडीए को मिलेगी आय

By Nov 15, 2025

बरेली शहर के रामगंगा नगर आवासीय योजना में बनकर तैयार रामायण वाटिका अब आमजन के लिए खुलने को तैयार है। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने इसके शुभारंभ से पहले पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क तय कर लिया है। यह वाटिका आध्यात्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में उभरेगी, जहाँ भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास के प्रसंगों को प्रतिमाओं और त्रेतायुगीन वनस्पतियों के रूप में जीवंत किया गया है।

वाटिका में भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो इसका मुख्य आकर्षण है। भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर रावण वध तक के विभिन्न दृश्यों को यहाँ प्रतिमाओं के जरिए उकेरा गया है। चित्रकूट, दंडकारण्य, पंचवटी, माता शबरी आश्रम, पंपा सरोवर, किष्किंधा, अशोक वाटिका और द्रोणागिरी वन जैसे स्थानों में प्रभु श्रीराम के बिताए गए संस्मरणों को भव्य-दिव्य प्रतिमाओं और सैकड़ों प्रजाति के पुष्प-पौधों के माध्यम से धरातल पर उतारा गया है।

प्रवेश शुल्क की बात करें तो, आमजन के लिए रामायण वाटिका में 20 रुपये का प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है। दस वर्ष से कम आयु के बच्चों को 10 रुपये में प्रवेश मिलेगा, जबकि स्कूली यूनिफॉर्म में टूर पर पहुंचने वाले स्कूली बच्चों के लिए केवल 5 रुपये का शुल्क तय किया गया है।

बीडीए उपाध्यक्ष डा. मनिकंडन ए. ने बताया कि रामायण वाटिका को आमजन के लिए खोलने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा, “वाटिका का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों होने की उम्मीद है, जिसके लिए उनके दौरे का इंतजार किया जा रहा है। इससे पहले टिकट की दर और अन्य बचे हुए कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह पार्क शहरवासियों के लिए पर्यटन के साथ बरेली विकास प्राधिकरण के लिए आय का जरिया भी बनेगा।”

यह वाटिका केवल दर्शनार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भी बनेगी। यहाँ बने ओपन एयर थियेटर और शबरी आश्रम में रामचरित मानस पाठ, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति भी होगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ जन्मदिन की पार्टियों और अन्य छोटे-छोटे आयोजनों को किराए पर आयोजित करने की भी सुविधा मिलेगी। पार्क की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई है, जिसके चलते सप्ताह में एक दिन अवकाश रखने पर भी विचार किया जा रहा है। इस वाटिका का मुख्य उद्देश्य है कि पर्यटक प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र को स्वयं में आत्मसात कर सकें।

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