सऊदी अरब के लिए सिरदर्द बने हूती विद्रੋही, बढ़ाई सैन्य ताकत | international news
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में इन विद्रोहियों ने अपनी सैन्य क्षमताओं का आक्रामक प्रदर्शन करते हुए सऊदी अरब के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और रणनीतिक तेल भंडारों पर हमले किए हैं। यमन के पहाड़ी इलाकों में मजबूत पकड़ रखने वाले इन विद्रोहियों के पास अब उन्नत ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा मौजूद है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार मार्ग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी खतरे में पड़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हूतियों की इस बढ़ती ताकत के पीछे ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की अहम भूमिका है। यद्यपि तेहरान लगातार हथियारों की आपूर्ति से इनकार करता रहा है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि विद्रोहियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सैन्य उपकरण मिल रहे हैं। सऊदी अरब के पास अमेरिकी रक्षा प्रणालियों का एक विशाल भंडार होने के बावजूद, कम लागत वाले ड्रोनों और मिसाइलों का मुकाबला करने में भारी आर्थिक और सामरिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों के सीमित इस्तेमाल और लंबी सीमाई इलाकों की सुरक्षा के चलते रियाद की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
इस संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभावों से पूरे खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। सऊदी अरब अपनी महत्वाकांक्षी आर्थिक योजनाओं के तहत खुद को वैश्विक व्यापार और पर्यटन का केंद्र बनाना चाहता है, लेकिन लगातार हो रहे इन हमलों से निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। यदि कूटनीतिक स्तर पर जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष पश्चिम एशिया में एक बड़े और विनाशकारी युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बनी हुई है।
