एलॉन मस्क और रिलायंस जियो के बीच सैटेलाइट इंटरनेट बाजार की जंग तेज | international news
भारत के उभरते हुए सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार अपने पैर पसार रही है। एक तरफ जहाँ एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी कमर्शियल सेवाओं को शुरू करने के लिए लंबे समय से मंजूरियों का इंतजार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रिलायंस जियो ने करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशनों का एक व्यापक नेटवर्क स्थापित करने की अपनी योजना सामने रखी है। इस बड़े प्लान के सामने आने के बाद से बाजार में हलचल बढ़ गई है और उद्योग जगत में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रिलायंस जियो की योजना केवल आसमान से इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क को इस सैटेलाइट तकनीक के साथ एकीकृत करना चाहती है। इसके जरिए देश के दूरदराज के गांवों, द्वीपों, बॉर्डर के इलाकों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, डिफेंस और समुद्री सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी ओर, स्टारलिंक पिछले कई वर्षों से भारत में प्रवेश के प्रयास कर रहा है और जरूरी लाइसेंस हासिल करने के बाद भी अंतिम कमर्शियल लॉन्च का इंतजार कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में ‘फर्स्ट-मूवर एडवांटेज’ यानी पहले कदम रखने का फायदा बहुत बड़ा होता है। जो कंपनी अपनी सेवाएं बाजार में पहले उतार लेगी, वह ग्राहकों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने और सरकारी नीतियों के साथ तालमेल बिठाने में आगे रहेगी। मस्क की ओर से हाल ही में उठाए गए सवालों ने इस पूरी प्रक्रिया में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और विनियामक पेचीदगियों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है, जिससे आने वाले दिनों में भारत के टेलीकॉम सेक्टर में रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।
