जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करना पड़ेगा भारी, हो सकती है 5 साल तक की जेल | national news
राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब औपचारिक रूप से विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल नहीं रह गया है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति या संगठन वहां प्रदर्शन करने की कोशिश करता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। नए कानूनी प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में अब आसानी से जमानत मिलना भी मुश्किल हो गया है, जिससे प्रदर्शनकारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कड़े कानूनी प्रावधान और धाराएं
दिल्ली के प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति के आंदोलन या धरना देने पर पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत इलाके में निषेधाज्ञा लागू रहती है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने पर पाबंदी है। इस आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है, जिसमें छह महीने तक की कैद का प्रावधान है। यदि प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक होती है या सरकारी काम में बाधा डाली जाती है, तो कानूनी शिकंजा और अधिक कस जाता है।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर एक्शन
प्रदर्शनी के दौरान यदि बसों, बैरिकेड्स या किसी अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है। इसमें पांच साल तक की जेल की सजा के साथ-साथ नुकसान की भरपाई भी संबंधित आयोजकों या प्रदर्शनकारियों से ही वसूली जाती है। पुलिस प्रशासन के साथ टकराव और बल प्रयोग की स्थिति में यह गैर-जमानती अपराध बन जाता है। इस सख्ती का उद्देश्य शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों को असुविधा से बचाना है।
