सत्ताईस साल पुराने सिपाही हत्याकांड का फरार आरोपी आगरा जेल में शिनाख्त के बाद बेनकाब | agra news
आगरा के खेरागढ़ थाना क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय पहले हुई एक सनसनीखेज वारदात के मुख्य आरोपी को कानूनी शिकंजे में कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है। वर्ष 1998 में हुई इस घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई थी और उसका सरकारी असलहा भी लूट लिया गया था। इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात भूरा को पुलिस ने हाल ही में मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया को पुख्ता करने के लिए गुरुवार को आगरा जेल में उसकी शिनाख्त परेड आयोजित की गई।
इस शिनाख्त परेड के दौरान करीब एक दर्जन एक जैसे कद-काठी के बंदियों के बीच खड़े आरोपी की पहचान घटना के समय वादी रहे और वर्तमान में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात उमेश तथा तत्कालीन सिपाही व वर्तमान उपनिरीक्षक चरण सिंह ने की। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी और जमील पुत्र फारुख के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाकर मध्य प्रदेश में छिपकर रह रहा था। समय के साथ उसने अपना हुलिया और ठिकाना दोनों बदल लिया था, लेकिन पुलिस ने पुराने अभिलेखों को खंगालकर आखिरकार उसे दबोच लिया।
इस प्रकार के पुराने मामलों में अपराधियों की धरपकड़ और कानूनी शिनाख्त से न्याय व्यवस्था में आम जनता का भरोसा मजबूत होता है और यह संदेश जाता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। पुलिस अब इस मामले में लूटी गई राइफल की बरामदगी और अन्य बचे हुए पहलुओं पर गहनता से जांच कर रही है ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की इस कार्रवाई से यह साबित हो गया है कि गंभीर अपराधों में लिप्त अपराधियों को समय बीतने के बावजूद बख्शा नहीं जाएगा।
