भारतीय सेना लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर स्वदेशी पैराशूट से करेगी उतरने का अभ्यास | ladakh news
भारतीय रक्षा बलों की उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सामरिक ताकत को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। अब देश के वीर जवान 18,000 फीट तक की ऊंचाई वाली बर्फीली और दुर्गम चोटियों पर स्वदेशी तकनीक से बने पैराशूट के जरिए सुरक्षित उतर सकेंगे। लद्दाख के न्योमा स्थित मुध ड्रॉप जोन में इस अत्याधुनिक पैराशूट प्रणाली का पहला लाइव जंप परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है। इस स्वदेशी उपलब्धि से सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही और रणनीतिक तैनाती बेहद आसान हो जाएगी।
अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहद कम वायुदाब, न्यूनतम तापमान और अनिश्चित हवाओं के बीच पैराशूट से उतरना बेहद जोखिम भरा होता है। इन सभी भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए ही इस विशेष पैराशूट प्रणाली को डिजाइन किया गया है। वायुसेना के विमान से छलांग लगाने के बाद पैराट्रूपर ने तय ऊंचाई पर पैराशूट को सफलतापूर्वक संचालित किया और सुरक्षित लैंडिंग पूरी की। इस स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम की मदद से एक साथ बड़ी संख्या में सैनिकों को विपरीत परिस्थितियों में भी ड्रॉप कराया जा सकता है।
इस स्वदेशी तकनीक के विकसित होने से भविष्य के सामरिक अभियानों में सेना को अभूतपूर्व बढ़त मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते इस कदम से देश की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चाक-चौबंद हो गई है।
