वकीलों को जेल में सुविधाएं: दिल्ली HC ने DG जेल को दिए निर्देश, जानिए क्या है मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को जेलों में बंद कैदियों से कानूनी मुलाकात के लिए जाने वाले वकीलों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग वाली एक याचिका पर दिल्ली जेल महानिदेशक को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने जेल महानिदेशक को मौजूदा स्थिति का जायजा लेने और कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने को कहा है।
यह मामला वकीलों को जेलों में अपने मुवक्किलों से मिलने के दौरान आ रही कठिनाइयों से संबंधित है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के तहत प्रभावी न्याय तक पहुंच सुनिश्चित नहीं की जा सकती, यदि वकीलों को जेलों के भीतर अपने मुवक्किलों से मिलने के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। दिल्ली की जेलों में जाने वाले वकीलों को साफ पेयजल की व्यवस्था न होना, उचित प्रतीक्षा स्थल का अभाव, स्वच्छ शौचालयों की कमी, वकीलों के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था न होना, पार्किंग की समस्या व जेल परिसर के भीतर आने-जाने के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा का अभाव जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में विशेष रूप से जेलों में कानूनी मुलाकात के लिए इस्तेमाल की जा रही मुलाकात जंगला व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई गई है। इस व्यवस्था में वकील व कैदी के बीच कांच की दीवार होती है और दोनों को टेलीफोन या इंटरकॉम के जरिए बातचीत करनी पड़ती है, जिससे कई बार आवाज स्पष्ट सुनाई नहीं देती या बातचीत ठीक से नहीं हो पाती। ऐसी व्यवस्था में मामले की रणनीति पर गोपनीय बातचीत करना, मुवक्किल से आवश्यक निर्देश लेना व प्रभावी तरीके से कानूनी कार्यवाही की तैयारी करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, कानूनी मुलाकात के लिए समय निर्धारित करने की कोई प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण वकीलों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। महिला वकीलों के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय, ढके हुए प्रतीक्षा स्थल, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था तथा अत्यधिक गर्मी या सर्दी से बचाव जैसी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो हफ्ते के भीतर जेल महानिदेशक के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन देने की अनुमति दी है, जिस पर महानिदेशक को उचित तरीके से विचार करने का निर्देश दिया गया है।
