बैंक कर्जदार और गारंटर दोनों से एक साथ वसूल सकता है लोन: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोन की वसूली को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बैंक किसी भी लोन की रकम की वसूली के लिए कर्जदार और गारंटर दोनों पर एक साथ कार्रवाई करने का अधिकार रखता है। यह फैसला भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 128 पर आधारित है, जिसके अनुसार गारंटर की देनदारी मुख्य कर्जदार के समान होती है, जब तक कि गारंटी अनुबंध में कोई विपरीत शर्त न हो।
यह मामला तब सामने आया जब दो गारंटरों ने मुख्य कर्जदार द्वारा लिए गए विभिन्न लोनों की अदायगी में चूक के बाद बैंक द्वारा उनके वेतन से कटौती का विरोध किया। गारंटरों की दलील थी कि बैंक को पहले मुख्य कर्जदार से वसूली करनी चाहिए और केवल शेष राशि के लिए ही उनसे संपर्क किया जाना चाहिए।
हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक गारंटी अनुबंध में स्पष्ट रूप से यह न लिखा हो कि गारंटर की देनदारी बाद के चरण में आएगी, तब तक बैंक दोनों पक्षों के खिलाफ एक साथ वसूली की कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गारंटर लोन चुकाता है, तो वह बाद में मुख्य कर्जदार से उस रकम की वसूली का दावा कर सकता है, लेकिन इससे बैंक की वसूली प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगेगी।
इस मामले में, कोर्ट ने पाया कि याचियों ने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए थे, जिसके कारण उन पर एक लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया गया। कोर्ट ने जोर दिया कि न्याय पाने के लिए अदालत में सभी तथ्यों का पूर्ण खुलासा आवश्यक है।
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