स्मार्ट मीटर घोटाला: केंद्र की 18956 करोड़ की मंजूरी पर यूपी में 27342 करोड़ का टेंडर, जनता पर बोझ का खतरा
स्मार्ट मीटरों की खरीद में उत्तर प्रदेश में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत स्मार्ट मीटरिंग के लिए कुल 18,956 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
टेंडर में भारी अंतर पर उठे सवाल
हालांकि, उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों के लिए जारी किए गए टेंडर की राशि 27,342 करोड़ रुपये है। यह स्वीकृत राशि से लगभग 8,500 करोड़ रुपये अधिक है। इस अंतर ने बिजली उपभोक्ताओं और राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के बीच चिंता पैदा कर दी है।
राज्यसभा में उठा मुद्दा
राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने इस मुद्दे को संसद में उठाया था। केंद्रीय विद्युत राज्यमंत्री श्रीपाद नायक ने जवाब देते हुए स्वीकृत राशि का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि योजना के तहत लाइन लॉस कम करने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 21,782 करोड़ और स्मार्ट मीटरिंग के लिए 18,956 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।
जनता पर बोझ का खतरा
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यदि अतिरिक्त राशि का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला गया, तो उन्हें महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस राशि के अंतर की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह मामला जनता के पैसे के दुरुपयोग और पारदर्शिता के अभाव की ओर इशारा करता है।
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