लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद: PNC पर कार्रवाई, CBI जांच का भी इतिहास
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के धंसने की घटना के बाद कार्यदायी संस्था पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की है। कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। कंपनी पर परफॉरमेंस सिक्योरिटी का दो प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया है।
यह पहली बार नहीं है जब पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड विवादों में घिरी है। इससे पहले 2024 में मध्य प्रदेश के छतरपुर में एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले में भी कंपनी का नाम सामने आया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तब कंपनी के निदेशकों सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। CBI ने झांसी-खजुराहो हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े इस मामले में रिश्वत की रकम के साथ एनएचएआई के अधिकारियों और कंपनी के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।
CBI ने पीएनसी के ठिकानों पर भी छापे मारे थे, जिसमें लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल थे। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के आगरा से फिरोजाबाद के बीच 56 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण भी पीएनसी ने ही किया था, जो उद्घाटन के कुछ महीनों के भीतर ही धंस गया। इसी तरह, न्यू सदर्न बाईपास का निर्माण भी इसी कंपनी ने किया था, जो कई बार धंस चुका है।
इससे पहले, छतरपुर में पीएनसी पर भूमि से मुरम और मिट्टी के अवैध खनन का आरोप लगा था, जिसके लिए कलेक्टर न्यायालय ने कंपनी पर 104 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया था। इन घटनाओं से सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिससे जनता को असुविधा और सुरक्षा संबंधी चिंताएं होती हैं।
