उत्तराधिकार कानून: हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव राजस्व को किया तलब, 50 हजार का हर्जाना
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजस्व संहिता के उत्तराधिकार संबंधी कानूनों को लेकर गठित कमेटी की कार्रवाई पर अपर मुख्य सचिव राजस्व को तलब किया है। न्यायालय ने पूछा है कि प्रदेश कैबिनेट की सब-कमेटी ने अब तक क्या कार्रवाई की है। यह आदेश सिद्धार्थ शुक्ला की जनहित याचिका पर पारित किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 108, 109 और 110 को चुनौती दी गई है। याची का तर्क है कि ये प्रावधान विवाहित महिलाओं को कृषि भूमि के उत्तराधिकार में निचले क्रम में रखते हैं, जो संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में राज्य सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। न्यायालय ने पाया कि सात माह पूर्व दिए गए आदेश का अनुपालन अब तक नहीं हुआ है। यह हर्जाना शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने वाली कमेटी के अध्यक्ष/विशेष सचिव को अगली सुनवाई पर हाजिर होने के आदेश के साथ लगाया गया है। यह मामला सुलतानपुर के लम्भुआ में एक ही प्लाट पर चार विद्यालय चलाने से संबंधित है।
इन अदालती कार्रवाइयों से यह स्पष्ट होता है कि भूमि उत्तराधिकार और शैक्षिक संस्थानों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभा रही है। सरकार को इन मुद्दों पर त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के अधिकारों और सुविधाओं पर पड़ेगा।
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