यूपी के 1000 करोड़ के फर्जीवाड़े के आरोपी राशिद नसीम UAE में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित 1000 करोड़ रुपये के शाइन सिटी फर्जीवाड़ा मामले में वांछित आरोपी राशिद नसीम को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह बड़ी सफलता प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रयासों का नतीजा है, जिसने यूएई अधिकारियों के अनुरोध पर कार्रवाई की। राशिद नसीम, जो लखनऊ स्थित शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर हैं, को दुबई में हिरासत में लिया गया है।
आर्थिक भगोड़ा घोषित और संपत्तियां जब्त
राशिद नसीम को लखनऊ की विशेष पीएमएलए अदालत ने अप्रैल 2025 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत घोषित किया था। इसके बाद, दिसंबर 2025 में अदालत ने उनकी 127.98 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश भी जारी किया था। ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज किए गए 554 मामलों के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि शाइन सिटी समूह ने रियल एस्टेट योजनाओं और मल्टी-लेवल मार्केटिंग के जरिए निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करीब 800 से 1000 करोड़ रुपये जुटाए। जांच से बचने के लिए नसीम ने समन का जवाब नहीं दिया और कथित तौर पर नेपाल के रास्ते भारत छोड़कर दुबई भाग गए थे। ईडी ने जनवरी 2026 में यूएई अधिकारियों को उनके खिलाफ एक विस्तृत डोजियर सौंपा था, जिसके बाद यह गिरफ्तारी हुई है।
निवेशकों के सपनों से खिलवाड़
शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम पर आरोप है कि उन्होंने मध्यम वर्गीय लोगों को सस्ते प्लॉट और फ्लैट का सपना दिखाकर हजारों करोड़ रुपये की ठगी की। निवेशकों से बुकिंग और आसान किस्तों के नाम पर बड़ी रकम ऐंठी गई। जब लखनऊ और वाराणसी में ठगी के मुकदमे दर्ज होने लगे, तब यह मामला प्रकाश में आया और पुलिस व जांच एजेंसियां हरकत में आईं। लखनऊ के गोमती नगर थाने में ही सैकड़ों मामले दर्ज हैं, जबकि पूरे प्रदेश में कंपनी के खिलाफ लगभग तीन हजार से ज्यादा मामले बताए जाते हैं। यूपी के अलावा दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुवाहाटी और महाराष्ट्र से भी शिकायतें दर्ज हुईं। देशभर में 10 लाख से अधिक निवेशकों के प्रभावित होने का दावा किया गया है। इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू और ईडी द्वारा की जा रही है।
वित्तीय लेनदेन की जांच जारी
मूल रूप से प्रयागराज के करेली क्षेत्र का निवासी राशिद नसीम ने 2013 में शाइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की थी। आरोप है कि उसके पास जमीन न होने के बावजूद, किसानों के खेतों में होर्डिंग लगवाकर उन्हें अपनी प्रोजेक्ट साइट बताता था, जिसके लिए किसानों को प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये दिए जाते थे। मामला सामने आने पर वह करीब तीन साल पहले दुबई भाग गया था। अब गिरफ्तारी के बाद, जांच एजेंसियां उसके वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की गहन जांच कर रही हैं, ताकि ठगी गई राशि की वसूली की जा सके और अन्य दोषियों का भी पता लगाया जा सके।
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