अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला, ‘वोटबंदी’ अभियान से PDA को निशाना बनाने का आरोप – UP Politics
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने मतदाताओं को भेजे जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नोटिसों को ‘वोटबंदी अभियान’ करार दिया और इसे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्गों के वोट काटने का एक ‘बहुत बड़ा षडयंत्र’ बताया। इस कदम से आम जनता में अपने मताधिकार और नागरिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं को SIR के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो नोटबंदी के बाद भाजपा सरकार का ‘वोटबंदी’ अभियान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीयत पहले भी खराब थी और अब भी खराब है। पहले सिर्फ मुसलमानों को कागजात के लिए परेशान किया जाता था, लेकिन अब हिंदुओं को भी नोटिस पर नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग गलत वोटों के पकड़े जाने पर संबंधित लोगों को निरुद्ध केंद्र भेजने का दावा कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब वोट के आधार पर नागरिकता तय की जाएगी और लोगों को उनकी जमीन, घर-मकान से बेदखल किया जाएगा? अखिलेश यादव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के परिजनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब ऐसे प्रतिष्ठित लोगों के परिजनों को भी नकार दिया गया, तो आम लोगों का क्या होगा। मतदाता पहचान पत्र नहीं नहीं होने पर वे और उनके परिवार के बुजुर्ग व बच्चे अपने अधिकार, विरासत और जमा-पूंजी के जब्त होने के डर से हमेशा तनाव में रहेंगे।
सपा प्रमुख ने भाजपा को ‘बेईमान पार्टी’ बताते हुए कहा कि भाजपा ने अपनी बेईमानी और धोखेबाजी के कारण अपना जनाधार खो दिया है, इसीलिए अब उसे सिर्फ धांधली का ही भरोसा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता पूछ रही है कि जिन कागजों के आधार पर मतदाताओं के नाम, उम्र और अन्य विवरण ठीक करने का दावा आयोग कर रहा है, वही कागज तो पहले भी दिखाए गए थे, तो फिर गलती कैसे हुई? इसका मतलब है कि गलती चुनाव आयोग ने की और वोट सही कराने के लिए जनता को अपना सारा काम छोड़कर दौड़ना पड़ रहा है, जबकि इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यह गलती दोबारा नहीं होगी।
