UP Courts: नई अदालतों के गठन पर हाईकोर्ट सख्त, प्रमुख सचिव विधि को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य में न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 900 नई अदालतों के गठन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस मामले में प्रमुख सचिव विधि को 9 मार्च को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है। यह कदम प्रदेश में लंबित मुकदमों की संख्या कम करने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया है। याचिका में प्रदेश में कुल 9149 अदालतों के गठन का मुद्दा उठाया गया है। राज्य सरकार की एक उच्च स्तरीय कमेटी ने अक्टूबर 2024 में ही पहले चरण में 900 अदालतों के गठन की बात सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर ली थी। इन अदालतों में 225 एचजेएस स्तर के, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें शामिल हैं।
हालांकि, इस संबंध में बात आगे न बढ़ पाने पर न्यायालय ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता ने बताया कि 19 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक हुई थी, लेकिन बैठक के मिनट्स अभी नहीं मिल पाए हैं। इस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय करते हुए प्रमुख सचिव विधि को तलब किया है ताकि UP Courts के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
