फर्जी डिग्री रैकेट: 9 राज्यों में फैला `fake degree scam`, SIT ने कानपुर यूनिवर्सिटी में खंगाले दस्तावेज
कानपुर से उजागर हुए एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी गई है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों से जुड़ा हुआ है, जिसने सैकड़ों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। एसआईटी ने सोमवार देर रात कानपुर यूनिवर्सिटी में छापेमारी कर दस्तावेजों की गहन जांच की, जो इस `fake degree scam` के व्यापक नेटवर्क को दर्शाता है।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब किदवई नगर पुलिस ने गोशाला चौराहा स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन पर छापा मारा और शैलेंद्र ओझा समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनके पास से विभिन्न विश्वविद्यालयों की 900 से अधिक फर्जी डिग्रियां और माइग्रेशन प्रमाण पत्र बरामद हुए थे। पुलिस आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एसआईटी को सौंप दी थी। शैलेंद्र ओझा, जो 2003 से कोचिंग चला रहा था, बाद में फर्जी डिग्रियां बनवाने के धंधे में उतर गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली सहित लगभग नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों और बाबुओं से जुड़े हैं। एसआईटी प्रभारी एडीसीपी साउथ ने बताया कि बरामद दस्तावेजों के सत्यापन के लिए टीमें गठित की गई हैं। सोमवार को सीएसजेएम यूनिवर्सिटी की 357 डिग्रियों और माइग्रेशन सर्टिफिकेट का सत्यापन किया गया। एसआईटी की टीमें अब अन्य राज्यों की यूनिवर्सिटी में भी जाकर दस्तावेजों की जांच करेंगी।
इस मामले में छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे फरार चल रहे हैं, जिनकी तलाश में सर्विलांस टीम जुटी हुई है। ये लोग फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां, ग्रेड शीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते थे। सर्विलांस टीम उन बाबुओं पर भी नजर रख रही है जो इस गिरोह को डिग्रियां मुहैया कराते थे। एसआईटी पूर्व में सामने आए फर्जी डिग्री मामलों की भी समीक्षा कर रही है, जिसमें कल्याणपुर के दो और कोतवाली थाने में दर्ज आशीष शुक्ला का मामला शामिल है। बरामद दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही आरोपियों को रिमांड पर लेने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
