लखनऊ में बेटे ने की पिता की निर्मम हत्या, शव के टुकड़े कर ठिकाने लगाने की कोशिश, Lucknow crime news से सनसनी
लखनऊ में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता की निर्मम हत्या कर दी। आरोपी बेटे ने हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े कर दिए, जिससे पूरे इलाके में Lucknow crime news को लेकर सनसनी फैल गई है। मृतक के पिता और आरोपी के दादा सुरेंद्र पाल सिंह राजावत का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई… बेटा तो चला ही गया, उसके साथ मेरा पौत्र भी अपराधी बन गया, उसकी जिंदगी भी तबाह हो गई।”
जघन्य हत्याकांड का खुलासा
यह घटना आशियाना सेक्टर एल में हुई, जहां 45 वर्षीय मानवेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे। डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के अनुसार, 20 फरवरी की सुबह मानवेंद्र सिंह के बेटे अक्षय प्रताप (20) ने अपने पिता को गोली मार दी। हत्या के बाद अक्षय ने अपने पिता के शव के हाथ-पैर काटकर सदरौना के पास फेंक दिए और बाकी धड़ को घर में ही एक नीले ड्रम में छिपा दिया। पुलिस को घर की तलाशी के दौरान तीसरी मंजिल पर ड्रम में शव का ऊपरी हिस्सा मिला, जबकि हाथ-पैर गायब थे। घर से 20 लीटर के गैलन में एसिड भी बरामद हुआ, जिससे पुलिस का दावा है कि आरोपी शव को जलाने की तैयारी में था।
गुमशुदगी की रिपोर्ट और पुलिस जांच
हत्या के बाद, आरोपी अक्षय प्रताप ने 20 फरवरी की सुबह अपने पिता के दिल्ली जाने और 21 फरवरी तक न लौटने की झूठी कहानी गढ़ते हुए आशियाना कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि पिता के तीनों मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। थाने से लौटने के बाद अक्षय ने मानवेंद्र के मित्र सोनू गुप्ता को बताया कि पिता ने आत्महत्या कर ली है। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और सोनू गुप्ता व पड़ोसियों से कड़ाई से पूछताछ की। इसी दौरान अक्षय के जघन्य अपराध का खुलासा हुआ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और संपत्ति विवाद की आशंका
जांच में पता चला है कि मृतक मानवेंद्र की आशियाना और कानपुर रोड के बाराबिरवा चौराहे पर शराब की दुकानें थीं। इसके अलावा, सालेहनगर और बुद्धेश्वर में उनके पैथोलॉजी सेंटर भी थे। मानवेंद्र की पत्नी का निधन 2017 में हो चुका था। वह आशियाना स्थित अपने घर में बेटे अक्षय प्रताप सिंह और बेटी कृति (17) के साथ रहते थे। अक्षय बीकॉम का छात्र है और कृति 11वीं में पढ़ती है। मानवेंद्र के छोटे भाई, जो सचिवालय सुरक्षा में पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, 20 फरवरी को गांव गए हुए थे और 22 फरवरी को लौटे। पुलिस इस मामले में संपत्ति विवाद या अन्य किसी कारण की भी जांच कर रही है और परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की जाएगी। इस घटना ने समाज में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति और पारिवारिक मूल्यों के पतन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
