DRDO के बजट में 2283 करोड़ की वृद्धि, कानपुर के रक्षा उत्पादन को मिलेगी रफ्तार | Defense Budget News
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा संगठन DRDO के सालाना बजट में 2283 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी करने का एलान किया है। इस वृद्धि का उद्देश्य रक्षा उत्पादों के निर्माण, तकनीक और शोध में विकास को गति देना है। इस फैसले का सीधा असर कानपुर स्थित रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (DMSRDE) पर पड़ेगा, जो तीनों सेनाओं के लिए आवश्यक रक्षा उत्पादों के प्रोटोटाइप तैयार करने के साथ-साथ नई तकनीक और सुविधाओं पर शोध करता है।
DMSRDE ने हाल ही में देश के सबसे सशक्त ब्रह्मोस मिसाइल के लिए स्वदेशी रैमजेट ईंधन विकसित किया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इससे पहले यह नेफथाइल ईंधन अमेरिका समेत दूसरे देशों से आयात करना पड़ता था। इसके अलावा, DMSRDE ने लेवल-छह श्रेणी की देश की सबसे हल्की बुलेटप्रूफ जैकेट भी बनाई है। संस्थान ने सशस्त्र बलों के लिए बैलेस्टिक हेलमेट, ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट, एंटी माइन बूट और न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल खतरों से सुरक्षा देने वाले एनबीसी सूट भी विकसित किए हैं। नेवी के लिए समुद्री खारे पानी को मीठे पानी में बदलने वाली पॉलीमर मेंब्रेन भी DMSRDE की देन है।
बजट वृद्धि के अलावा, कानपुर स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को भी राहत मिली है। सरकार ने विमान, रक्षा एयरक्राफ्ट और कलपुर्जों को विदेशों से मंगवाने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट का प्रावधान किया है। इसका सीधा असर स्वदेश में तैयार होने वाले विमानों, उनकी मरम्मत और रक्षा उपकरणों की ओवरहॉलिंग की लागत पर पड़ेगा। HAL कानपुर में विमानों की मरम्मत होती है, जबकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में तोपों समेत रक्षा हथियारों की ओवरहॉलिंग होती है। कस्टम ड्यूटी में कमी से इन कार्यों में आने वाला खर्च कम होगा, जिससे रक्षा प्रतिष्ठानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
