भारत में शक्तिशाली अल-नीनो और भीषण मौसम की चेतावनी | india weather news
भारत के पर्यावरण और मौसम जगत से जुड़ी एक बड़ी चेतावनी सामने आई है, जहां देश भर के 180 से अधिक वैज्ञानिकों ने मिलकर आगामी वर्षों में संभावित गंभीर जलवायु संकट को लेकर आगाह किया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में उत्पन्न हो रही असामान्य हलचल के चलते वर्ष 2026-27 का अल-नीनो पिछले कई दशकों के मुकाबले बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इस प्राकृतिक परिघटना का असर भारत के जंगलों, नदियों, तटीय क्षेत्रों और कृषि व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ने की आशंका जताई गई है (india weather news)।
वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, आगामी नवंबर महीने से देश के कई हिस्सों में तापमान में भारी बढ़ोतरी और सामान्य से बेहद कम बारिश दर्ज की जा सकती है। इस स्थिति से जल संकट गहराने का खतरा है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की फसलों और पशुपालन पर पड़ेगा। कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके शहरों में हीटवेव का प्रकोप आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है। इसके अलावा, सूखे की मार झेल रहे जंगलों में भीषण आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे वन्यजीवों और दुर्लभ प्रजातियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इस महा-संकट का गहरा साया मंडरा रहा है। तटीय इलाकों के आसपास मरीन हीटवेव आने से समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ेगा, जिससे कोरल रीफ यानी प्रवाल भित्तियों के नष्ट होने की आशंका है। मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े तटीय समुदायों और मछुआरों की आजीविका भी इससे प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आपदा आने के बाद आकलन करने के बजाय अभी से स्थानीय स्तर पर वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएं और व्यापक निगरानी तंत्र विकसित किया जाए (india weather news)।
