पीएनबी बैंक धोखाधड़ी: पूर्व अधिकारियों को 4 करोड़ के केस में 3 साल की सजा, CBI कोर्ट का फैसला
राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की जोरबाग शाखा से जुड़े करीब चार करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक के दो पूर्व अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने तत्कालीन चीफ मैनेजर व ब्रांच हेड कुलविंदर कौर जोहर और सीनियर मैनेजर रंजीव सुनेजा को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही दोनों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने बैंक के पैनल अधिवक्ता नरेंद्र सिंह परिहार को भी दोषी करार देते हुए ढाई साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह फैसला आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से होने वाले वित्तीय अपराधों पर कड़ी कार्रवाई होती है। इससे वित्तीय संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।
सीबीआई के अनुसार, इस मामले में एजेंसी ने 11 जुलाई 2013 को केस दर्ज किया था। आरोप था कि एमएस शंकर मेटल्स के मालिक संजीव दीक्षित ने अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। आरोपितों ने फर्जी और जाली संपत्ति दस्तावेजों के जरिए पीएनबी की जोरबाग शाखा से चार करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की।
जांच में सामने आया कि तत्कालीन बैंक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ता की मिलीभगत से फर्जी प्रापर्टी और केवाइसी दस्तावेजों के आधार पर यह ऋण स्वीकृत कराया गया। इसके बाद ऋण की राशि को फर्जी कंपनियों और बोगस बैंक खातों के जरिए दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल किया गया।
सीबीआई ने संजीव दीक्षित, एनएस परिहार, कुलविंदर कौर जोहर, रंजीव सुनेजा और निजी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। ट्रायल के बाद अदालत ने बैंक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ता को दोषी ठहराया। मामले का मुख्य आरोपित संजीव दीक्षित फरार है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है, जबकि कुछ अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
