हिंदी में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति का दूसरा संस्करण शुरू, शोधार्थियों को मिलेंगे 75000 रुपये प्रतिमाह
हिंदी भाषा में मौलिक शोध को प्रोत्साहित करने के लिए दैनिक जागरण ने ‘ज्ञानवृत्ति’ के दूसरे संस्करण की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य शोधार्थियों को अपनी मातृभाषा में नवीन ज्ञान की खोज और वर्तमान समस्याओं के समाधान पर केंद्रित शोध करने के लिए प्रेरित करना है। निर्णायक मंडल के सदस्य, प्रो. प्रमोद कुमार, इस पहल को ‘अनुकरणीय’ बताते हुए कहते हैं कि यह देश में शोध की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रो. कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में अधिकांश शोध ‘कॉपी-पेस्ट’ आधारित हो रहे हैं, जिससे मौलिक चिंतन का अभाव है। भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी में, यह स्थिति और भी गंभीर है। ज्ञानवृत्ति के माध्यम से शोधार्थियों को राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, भारतीय ज्ञान परंपरा, एआई के उपयोग व दुरुपयोग, साहित्य और संचार जैसे विषयों पर मौलिक शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस पहल के तहत चयनित शोधार्थियों को प्रतिमाह 75,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि उन्हें बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने शोध कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगी। प्रो. कुमार के अनुसार, जब शोध देश और समाज की वर्तमान चुनौतियों से जुड़े विषयों पर केंद्रित होगा, तो समाज को उसका तत्काल लाभ मिलेगा। यह पहल न केवल हिंदी में शोध को बढ़ावा देगी, बल्कि देश की आधी से अधिक आबादी की भाषा को वैज्ञानिक और सामाजिक नवाचार का माध्यम भी बनाएगी।
