आगरा में बाबा खाटू श्याम का भव्य दरबार, बेला-चमेली की सुगंध से महका माहौल, Khatu Shyam Agra भक्ति में लीन श्रद्धालु
आगरा शहर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब बांके बिहारी भक्त मंडल ने एक भव्य खाटू श्याम भजन संध्या का आयोजन किया। रामलीला मैदान स्थित श्रीराम हनुमान मंदिर में बाबा खाटू श्याम का दरबार बेला-चमेली के सुगंधित फूलों और कोलकाता से मंगाई गई 51 फूलों की मालाओं से सजाया गया था। मेहरून रंग की पोशाक में सजे बाबा की मनोहारी छटा ने Khatu Shyam Agra के श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शहर में धार्मिक सद्भाव और भक्तिमय वातावरण का सृजन करना था, जिसका सकारात्मक प्रभाव स्थानीय समुदाय पर पड़ा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मयंक अग्रवाल, उमेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल ने पावन ज्योति प्रज्ज्वलन के साथ किया। हाथरस से आए भजन गायक बैजू सनम ने “मैं हूं तेरा नौकर..”, “भूला नहीं हूं बाबा तेरी कृपा..” और “जिसकी नैया श्याम भरोसे..” जैसे भजनों से पूरे पंडाल को भक्तिरस में डुबो दिया। भजन गायिका गुंजन उपाध्याय ने भी “श्याम हारे के सहारे..” जैसे मधुर भजनों से देर रात तक संकीर्तन की धारा प्रवाहित की। स्थानीय कलाकार अंकित लवानिया और अनूप गोयल ने भी अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
वृंदावन से आए कलाकारों ने ब्रज की प्रसिद्ध फूलों की होली और मनमोहक मयूर नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। बाबा का दिव्य शृंगार बेंगलुरु से मंगाए गए सुगंधित फूलों और इत्र से किया गया था, जिसने दरबार की भव्यता में चार चांद लगा दिए। इस धार्मिक आयोजन के साथ-साथ 51 साधुओं और जरूरतमंदों को कंबल, टोपा और दस्ताने भेंट कर साधु सेवा का भी कार्य किया गया। अंत में श्याम रसोई और महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इसी कड़ी में, मां कैला देवी मित्र मंडल द्वारा भी मां कैला देवी का दरबार सजाया गया, जिसमें श्रद्धा और आस्था का अद्भुत प्रदर्शन हुआ। आकर्षक फूल बंगला सजाकर माता रानी का दिव्य शृंगार किया गया और उन्हें छप्पन भोग अर्पित किए गए। विधि-विधान से पूजन के बाद जागरण में भजन-कीर्तन और जयकारे गूंजते रहे। कन्या पूजन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भोजन ग्रहण किया। ये दोनों आयोजन आगरा में धार्मिक उत्साह और सामुदायिक भागीदारी का प्रतीक बने।
