Tu Meri Main Tera Review: कार्तिक-अनन्या की फिल्म में ‘पिंटरेस्ट बोर्ड’ सी गहराई
फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा’ प्यार की एक जानी-पहचानी कहानी पर आधारित है, जिसमें अमीर लड़के और छोटे शहर की लड़की की प्रेम कहानी को विदेशी लोकेशन पर दिखाया गया है। फिल्म में एक सतही प्रेम कहानी, सतही संघर्ष और मेलोड्रामा का मिश्रण है, जो दर्शकों को जोड़ने में असफल रहता है।
कहानी का सतहीपन
फिल्म की कहानी रूमी और रे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दस दिनों में एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। कहानी में भावनात्मक गहराई की कमी है और यह दर्शकों को जोड़ने में असफल रहती है। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की केमिस्ट्री फीकी लगती है और उनके चुंबन दृश्यों में भी कोई खास गर्मी नहीं है।
कलाकारों का प्रदर्शन
हालांकि, जैकी श्रॉफ और नीना गुप्ता ने अपने अभिनय से फिल्म को कुछ हद तक संभाला है। उनकी उपस्थिति फिल्म को एक लय देती है और दर्शकों को बांधे रखती है। कार्तिक आर्यन का ‘मैं क्यूट हूं’ वाला अंदाज़ अब पुराना लगने लगा है, और उनकी ‘अमीर लड़का-देसी दिल’ वाली छवि अब गहराई के तौर पर नहीं बेची जा सकती।
संघर्ष और संवाद
फिल्म का संघर्ष बहुत ही बचकाना है, जिसमें नायक को भारत छोड़कर अमेरिका बसने के लिए मजबूर होना पड़ता है। संवाद भी अक्सर बेतुके लगते हैं और ‘फालतू फेमिनिस्ट’ जैसे शब्दों का प्रयोग कहानी को और कमजोर करता है। फिल्म में बहुत अधिक ब्रांड प्लेसमेंट भी खटकता है।
निष्कर्ष
‘तू मेरी मैं तेरा’ एक ऐसी फिल्म बनने की कोशिश करती है जो युवा दर्शकों से जुड़ सके, लेकिन यह बहुत अधिक चमकदार और वैश्विक दिखने की कोशिश में अपने देसी दिल को खो देती है। इसमें भावनात्मक संघर्ष की कमी है, जो इसे एक औसत दर्जे की रोमांटिक फिल्म बनाती है।
