रेलवे की मनमानी: लोको पायलटों की भर्ती कर कोचों की सफाई करा रहा सिस्टम, कर्मचारियों को 20 हजार का नुकसान
पूर्वोत्तर रेलवे में सहायक लोको पायलट (एएलपी) पद पर नियुक्त कर्मचारियों को यांत्रिक कारखाना में कोचों की मरम्मत करनी पड़ रही है। कोई कोच की पेंटिंग कर रहा तो किसी से सफाई और धुलाई के साथ-साथ लोहा पीटने का काम लिया जा रहा है। रेलवे प्रशासन उन्हें अपने काडर में वापस नहीं जाने दे रहा, जिस कारण ये कर्मचारी पिछले आठ वर्षों से प्रबंधन की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब रेलवे में लोको पायलटों की कमी है और रेलवे बोर्ड रीइंगेजमेंट के तहत सेवानिवृत्त लोको पायलटों की पुन: तैनाती कर रहा है।
कर्मचारियों संग इस प्रकार के बर्ताव को रेल यूनियन मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर ने अगस्त 2018 में सहायक लोको पायलटों के 1681 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था। तीन स्तरों की परीक्षा पूरी होने के बाद पैनल जारी करने का समय आया तो पता चला कि पूर्वोत्तर रेलवे में केवल 865 पद ही रिक्त हैं। मामले को लेकर प्रश्न उठा तो रेलवे भर्ती बोर्ड ने लीपापोती शुरू कर दी। अभ्यर्थियों ने विरोध किया तो रेलवे प्रशासन ने उन्हें गुवाहाटी और जबलपुर जैसे स्थानों पर तैनात करना शुरू कर दिया। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के लगभग 550 अभ्यर्थी तीन वर्षों तक रेलवे भर्ती बोर्ड के चक्कर लगाते रहे।
इस बीच रेलवे ने सहायक लोको पायलटों की संख्या को सरप्लस बता उन्हें कारखानों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कई सहायक लोको पायलटों को गोरखपुर स्थित यांत्रिक कारखाना और सिग्नल कारखाना में तकनीशियन ग्रेड में समायोजित कर दिया गया। भत्ता और सुविधाओं में कटौती के चलते सहायक लोको पायलटों को महसूस हुआ कि रेलवे प्रशासन ने उनके साथ छल किया है। 30 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी के बावजूद उन्हें प्रति माह लगभग 20 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। कई सहायक लोको पायलटों ने वापसी के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के साथ ही कर्मचारियों ने यूनियन से गुहार लगाई। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्ता ने कहा कि सहायक लोको पायलटों के साथ अन्याय हुआ है। जो कर्मचारी वापस जाना चाहते हैं, उनसे विकल्प लेकर समायोजन का रास्ता प्रशासनिक आधार पर खोलना चाहिए। यदि रेल प्रशासन कर्मचारियों को न्याय देने में आनाकानी करता है तो यूनियन इस मुद्दे को आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के साथ उठाएगी।
रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर द्वारा आयोजित सहायक लोको पायलटों व तकनीशियनों की नियुक्ति मामले में फर्जीवाड़ा के आरोपों की सीबीआइ जांच चल रही है। भर्ती बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पीके राय को सेवा मुक्त किया जा चुका है। इंजीनियरिंग विभाग में तकनीशियन विनय कुमार श्रीवास्तव, कार्मिक विभाग में कार्मिक सहायक वरुण राज और बाहरी व्यक्ति सुजीत कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
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