गोरखपुर आयुष विश्वविद्यालय में मरीजों को बड़ी राहत, पंजीकरण और दवा वितरण की व्यवस्था में हुआ बदलाव, अब नहीं होगी भीड़
गोरखपुर स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय ने मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ओपीडी में लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या के कारण पुरानी व्यवस्था में काफी असुविधा हो रही थी। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पंजीकरण और दवा वितरण प्रणाली में व्यापक बदलाव किए हैं। कुलपति डॉ. के रामचंद्र रेड्डी ने स्वयं नई व्यवस्था का निरीक्षण किया और मरीजों से बातचीत की।
नई व्यवस्था के तहत, पंजीकरण और दवा वितरण के काउंटरों को मुख्य भवन के भूतल पर स्थित एक बड़े हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया है। पहले ये काउंटर छोटे कमरों में संचालित होते थे, जिससे मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और काफी भीड़भाड़ होती थी। अब बड़े हॉल में पर्याप्त जगह होने के कारण कतारें व्यवस्थित रहेंगी और मरीजों के बैठने के लिए भी समुचित व्यवस्था की गई है। महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय भी बनाए गए हैं, जो स्वच्छता और सुविधा सुनिश्चित करेंगे।
विश्वविद्यालय ने दवा वितरण प्रणाली को पूरी तरह से केंद्रीकृत करने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। अब जैसे ही किसी मरीज का पंजीकरण होगा, उसका विवरण सॉफ्टवेयर में दर्ज हो जाएगा। चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाएं भी तुरंत सॉफ्टवेयर में चिह्नित की जाएंगी। दवा वितरण कक्ष में मरीज को पंजीकरण क्रम के अनुसार पर्ची मिलेगी, जिससे दवा वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी। यह प्रणाली दवाओं के स्टॉक प्रबंधन में भी सहायक होगी।
कुलपति ने बताया कि इन बदलावों का उद्देश्य मरीजों को बेहतर और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने निरीक्षण के दौरान मरीजों से भी बात की, जिन्होंने नई व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। यह पहल न केवल मरीजों के समय की बचत करेगी, बल्कि अस्पताल के कामकाज को भी अधिक कुशल बनाएगी।
