दिल्ली-एनसीआर फिर बना ‘गैस चैंबर’, AQI 350 पार; स्मॉग का खतरा बढ़ा
राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप धारण कर लिया है। सोमवार शाम को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 352 दर्ज किया गया, जिसने शहर को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में धकेल दिया है। यह स्थिति तब है जब कुछ दिन पहले तेज हवाओं के चलने से AQI सुधरकर ‘खराब’ श्रेणी में आ गया था।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को हवा की गति में आई कमी और तापमान में संभावित गिरावट के कारण प्रदूषण के कणों के छंटने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों तक हवा की रफ्तार इसी तरह कम रहने और तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में स्मॉग की मोटी परत शहर को अपनी चपेट में ले सकती है, जिससे दृश्यता कम होगी और वायु गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है।
प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश और आंखों में जलन जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है।
गौरतलब है कि नवंबर महीने के अधिकांश दिनों में दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में ही रही है। सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से ही समस्या का समाधान नहीं होगा। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचना होगा, जैसे कि कचरा जलाना और वाहनों का अत्यधिक उपयोग।
वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए मौसमी कारकों के अलावा, दीर्घकालिक समाधानों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें औद्योगिक उत्सर्जन को कम करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और हरित क्षेत्रों का विस्तार शामिल है। जब तक इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाता, दिल्ली-एनसीआर को ‘गैस चैंबर’ बनने से रोकना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
