लोकसभा में एसआईआर पर घमासान, शीतकालीन सत्र की शुरुआत ही हंगामेदार
संसद के शीतकालीन सत्र का आगाज पहले ही दिन पक्ष-विपक्ष के तीखे टकराव के साथ हुआ, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा आने वाले दिनों में भी सदन की कार्यवाही पर हावी रहेगा। सोमवार को जैसे ही सत्र आरम्भ हुआ, कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने एसआईआर को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए सरकार पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया।
विपक्षी सदस्यों का मुख्य आरोप था कि बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए लाखों लोगों की पहचान और इसके पीछे की प्रक्रिया क्या थी। सदन में शोक संदेश और सम्मान प्रस्तावों के तुरंत बाद, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आकर हंगामा शुरू कर दिया। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई।
अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार सदस्यों से आग्रह किया कि मतभेद चर्चा से ही सुलझते हैं और जनता अपने प्रतिनिधियों से जवाबदेही की अपेक्षा करती है। हालांकि, विपक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा और सवालों व सदन के नियमित कामकाज पर लौटने की अपीलें बेअसर साबित हुईं। हंगामे के बीच, सदन को पहली बार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
दोबारा बैठक शुरू होने पर तनाव और भी बढ़ गया। इसी माहौल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शून्यकाल के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए: केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक और मणिपुर जीएसटी दूसरा संशोधन विधेयक। इसके साथ ही, वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान भी प्रस्तुत किए गए।
हालांकि, शोर-शराबे के कारण इन विधेयकों पर कोई गंभीर चर्चा संभव नहीं हो सकी और विरोध प्रदर्शन तेज होता गया। बार-बार की नारेबाजी और आसन के समीप बढ़ते तनाव के चलते सदन को दूसरी बार स्थगित करना पड़ा। दोपहर बाद कार्यवाही फिर से शुरू हुई, लेकिन माहौल पहले से भी अधिक अव्यवस्थित था।
विपक्षी सदस्य एसआईआर पर तत्काल चर्चा की मांग पर अड़े रहे और सरकार पर गंभीर सवालों की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे। इस हंगामे के बीच, मणिपुर जीएसटी संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जबकि अधिकांश विपक्षी सांसद विरोध स्वरूप वेल में ही खड़े रहे।
सत्र के पहले ही दिन सदन के ठप रहने और बार-बार स्थगन की नौबत आने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि एसआईआर पर बहस से बचा नहीं जा सकता। सरकार अपने प्रमुख विधेयकों को पारित कराने के एजेंडे के साथ सत्र में आई है, लेकिन विपक्ष एसआईआर पर चर्चा के बिना सदन चलाने के पक्ष में नहीं है। यह टकराव आने वाले दिनों में सत्र की दिशा तय करेगा और सदन का माहौल और अधिक गरमाने की संभावना है।
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