तेजस्वी यादव महागठबंधन विधायक दल के नेता चुने गए, सदन में आक्रामक तेवर
बिहार की राजनीति में शनिवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, राजद नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन विधायक दल का निर्विरोध नेता चुना गया। पटना में उनके सरकारी आवास पर आयोजित बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ-साथ कांग्रेस, वाम दल और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आइआइपी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और तेजस्वी के नाम पर अपनी सहमति जताई।
बैठक में आगामी विधान मंडल सत्र के लिए महागठबंधन की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। यह तय किया गया कि पार्टी सदन में जन-हित के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाएगी और एक आक्रामक लेकिन राष्ट्र-राज्य हित में सकारात्मक रणनीति अपनाएगी। इस दौरान, कांग्रेस की ओर से विधान पार्षद समीर सिंह ने रचनात्मक सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि पार्टी महागठबंधन की एकता के लिए प्रतिबद्ध है।
महागठबंधन के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अब चुनाव में हुई हार के कारणों पर चिंतन करने के बजाय भविष्य की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वर्तमान में संख्या बल में सत्ता पक्ष के भारी होने के बावजूद, महागठबंधन ने एकजुट रहने का संकल्प लिया है।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि जन-हित के किसी भी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर आक्रामक रुख बनाए रखने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, रोजी-रोजगार, महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और महागठबंधन के घोषणा-पत्र में शामिल अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी मुखरता से आवाज उठाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इन मुद्दों पर रचनात्मक आंदोलन भी आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में चुनाव परिणामों पर आश्चर्य और चिंता भी व्यक्त की गई। सूत्रों के अनुसार, विभिन्न सर्वे रिपोर्टों में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के लिए सर्वाधिक पसंदीदा चेहरा (42 प्रतिशत तक) बताए जाने के बावजूद आई अप्रत्याशित हार को सुनियोजित बताया गया। कुछ नेताओं ने हार के लिए प्रशासनिक मशीनरी और चुनाव आयोग की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया। वर्तमान में, विधानसभा में महागठबंधन की कुल सदस्य संख्या 35 है, जिसके साथ पार्टी सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।
