नई शिक्षा नीति लागू करने में बिहार फिसड्डी, छात्रों को UGC की सुविधाओं से वंचित
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को बिहार में प्रभावी ढंग से लागू करने में आ रही बाधाओं के चलते प्रदेश के उच्च शिक्षा के छात्र यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने से वंचित रह रहे हैं। यह स्थिति छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक संसाधनों से दूर कर रही है। सूत्रों के अनुसार, बिहार के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया है कि UGC की नई गाइडलाइन्स के अनुपालन के लिए आवश्यक तैयारियां अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
बिहार में उच्च शिक्षा से जुड़े नीति निर्धारकों में एकेडमिक सोच की कमी को NEP लागू करने में आ रही इस बड़ी चुनौती का मुख्य कारण माना जा रहा है। जहां देश के अन्य राज्यों के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अगले सत्र से साल में दो बार, जुलाई/अगस्त और जनवरी/फरवरी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं बिहार में छात्रों के लिए इस सुविधा को लेकर कोई स्पष्ट कार्य योजना तक नहीं बन पाई है। इसके अतिरिक्त, छात्र एक सत्र में दो अलग-अलग यूजी-पीजी कोर्स में पढ़ाई कर सकेंगे और दोनों डिग्रियां मान्य होंगी, लेकिन बिहार इस दिशा में पीछे है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को केवल वेतन-पेंशन की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि NEP 2020 के क्रियान्वयन को लेकर राज्य में शुरू से ही उदासीनता का रवैया देखा गया है। पूर्व में महागठबंधन सरकार के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर ने NEP को ‘संघ की सोच’ बताकर इसकी आलोचना की थी। इसके बाद एनडीए सरकार बनने पर भी NEP के क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कार्य योजना आकार नहीं ले पाई।
उच्च शिक्षा निदेशालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि NEP को लागू करने में कई अन्य राज्य बिहार से काफी आगे निकल चुके हैं, और बिहार में इसका क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि NEP के प्रति गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच सालों में राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में केवल सेमेस्टर सिस्टम ही लागू हो पाया है। पटना विश्वविद्यालय को छोड़कर अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक सत्र का शत-प्रतिशत संचालन भी अभी तक सुचारू नहीं हो पाया है।
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक माहौल बनाने और NEP को प्राथमिकता देने में बरती जा रही इस सुस्ती का सीधा खामियाजा प्रदेश के छात्रों को भुगतना पड़ेगा। UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को प्रवेश स्तर पर अपनी पसंद के कोर्स चुनने की सुविधा दी है। साथ ही, संस्थानों को छात्रों को किसी भी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने और पुनः दाखिला लेने की छूट देने का निर्देश दिया है। वोकेशनल और स्किल कोर्स के क्रेडिट को भी डिग्री कोर्स के क्रेडिट सिस्टम में शामिल करने के प्रावधान हैं, जिनका लाभ बिहार के छात्रों को फिलहाल नहीं मिल पा रहा है।
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