खराब खाना और बदसलूकी पर पिंच ऑफ स्पाइस को 55 हजार हर्जाना, consumer court का फैसला
रेस्टोरेंट में खराब गुणवत्ता का भोजन और कर्मचारियों द्वारा अभद्रता का शिकार हुए एक युवक को आखिरकार न्याय मिला है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने पिंच ऑफ स्पाइस रेस्टोरेंट के मालिक/प्रबंधक को पीड़ित को 55 हजार रुपये हर्जाना और वाद व्यय देने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी और मानसिक उत्पीड़न माना है।
यह घटना तब हुई जब पीड़ित आशीष गर्ग अपने परिजनों के साथ रेस्टोरेंट में भोजन करने गए थे। वहां न केवल भोजन की गुणवत्ता खराब थी, बल्कि सर्विस भी संतोषजनक नहीं थी। जब उन्होंने इस बारे में शिकायत की, तो कर्मचारियों और मैनेजर ने सबके सामने अभद्र व्यवहार किया। बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने को लेकर भी विवाद हुआ, जिसे उपभोक्ता के अनुसार देना अनिवार्य नहीं था। विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज का सामना करना पड़ा।
इस मामले में उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने रेस्टोरेंट प्रबंधन की कार्रवाई को सेवा में कमी और मानसिक उत्पीड़न करार दिया। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ताओं को खराब सेवा और दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है, और उन्हें इसके लिए उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
