उत्तर प्रदेश में दस्त से हर साल 28 हजार बच्चों की मौत, जागरूकता है बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 28 हजार बच्चों की मृत्यु प्रतिवर्ष दस्त के कारण हो जाती है। यह स्थिति विश्व स्तर पर भी चिंताजनक है, जहाँ हर साल दस्त से लाखों लोगों की मौत होती है, जिनमें बड़ी संख्या छोटे बच्चों की होती है। भारत में भी दस्त मौत का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दस्त से होने वाली अधिकांश मौतों को ओआरएस और जिंक के समय पर और सही उपयोग से रोका जा सकता है। यह उपचार सरल, सुरक्षित और प्रभावी है।
जागरूकता की कमी और ओआरएस के कम उपयोग को इस समस्या की जड़ बताया गया। विश्व स्वास्थ्य समुदाय ने 2030 तक दस्त से पीड़ित 70 प्रतिशत बच्चों को ओआरएस उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है, लेकिन भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा काफी कम है। कई बच्चे तो दस्त होने पर कोई उपचार ही नहीं पाते।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चे को दस्त होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत ओआरएस देना शुरू करें। चिकित्सक की सलाह पर जिंक की दवा दें और बच्चे को सामान्य भोजन जारी रखें। निर्जलीकरण के लक्षण दिखने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें। अनावश्यक एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवाओं का प्रयोग चिकित्सक की सलाह के बिना न करें।
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