उत्तर प्रदेश में उन्नत खेती की नींव रखेंगे 15 ‘बीज’ और ‘जैव संवर्धित’ गांव, UP farming को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) ने राज्य के 15 जिलों में ‘बीज गांव’ और ‘जैव संवर्धित गांव’ विकसित करने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्रदेश की उन्नत खेती की नींव रखेगा और UP farming को आधुनिक व टिकाऊ बनाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक चिह्नित जिले के दो गांवों की मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की मात्रा बढ़ाई जाएगी, जिससे फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाओ संकल्प अभियान
सीएसए विश्वविद्यालय ने ‘मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाओ संकल्प अभियान 2026-30’ की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय में वृद्धि करना और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसके लिए विश्वविद्यालय से संबद्ध 15 जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से दो-दो गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में वैज्ञानिकों की टीम द्वारा विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, जिसमें जनसंख्या, खेती योग्य भूमि, उर्वरक भूमि, पशुधन और दूध उत्पादन जैसे आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर गांवों की मिट्टी की जांच की जाएगी और उसमें जीवाश्म कार्बन की मात्रा को संतुलित किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी में 0.75 फीसदी से अधिक जीवाश्म कार्बन होना फसलों के लिए उत्तम माना जाता है। जीवाश्म कार्बन के संतुलित होने से मिट्टी से फसलों को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इससे न केवल फसलों का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
‘बीज गांव’ और ‘जैव संवर्धित गांव’ की भूमिका
‘बीज गांव’ में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित अत्याधुनिक प्रजातियों के बीज तैयार किए जाएंगे। यहां ब्रीडर बीज से फसलें उगाई जाएंगी, जिससे एक साल बाद किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले फाउंडेशन बीज उपलब्ध हो सकेंगे। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें सस्ते व विश्वसनीय बीज मिल पाएंगे।
वहीं, ‘जैव संवर्धित गांव’ में ऐसी फसलों को उगाया जाएगा जिनमें सामान्य से अधिक पोषक तत्व होते हैं। इन पोषणीय फसलों के उत्पादन से कुपोषण से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों को राहत मिलेगी। इन गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अन्य किसान भी इन तकनीकों को अपनाकर लाभान्वित हो सकें। अलीगढ़, इटावा, फर्रुखाबाद, हरदोई समेत कुल 15 जिलों के गांवों में यह कार्य शुरू हो चुका है और नोडल अधिकारियों को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह पहल उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी।
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