यूपी में मानसून सक्रिय: पश्चिम के आठ शहरों में भारी बारिश का अलर्ट, एक बच्ची की मौत
बंगाल की खाड़ी में बने एक सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता बढ़ गई है। इसका असर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों पर दिखना शुरू हो गया है, जिससे अगले तीन दिनों में प्रदेश भर में व्यापक बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ शहरों के लिए अत्यधिक भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इस बीच, संभल में एक दुखद घटना हुई, जहाँ मंगलवार सुबह बरसात के दौरान एक जर्जर मकान की छत गिरने से मलबे में दबकर एक मासूम बच्ची और उसकी ताई की मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
सहारनपुर में भी दो दिनों से शिवालिक पहाड़ियों पर हो रही भारी बारिश के कारण शाकंभरी खोल सहित क्षेत्र की नदियां उफान पर हैं। सोमवार को शाकंभरी खोल में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद, मंगलवार को सिद्धपीठ में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। पानी का बहाव अधिक होने पर पुलिस ने श्रद्धालुओं को कुछ देर रोका, लेकिन बाद में ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था कर उन्हें माता के दर्शन के लिए जाने दिया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा और मुरादाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, संभल, झांसी और ललितपुर जैसे करीब दो दर्जन से अधिक जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बदायूं, शाहजहांपुर, फतेहपुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज और बुंदेलखंड के अधिकतर जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
बीते 24 घंटों में प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिजनौर में सबसे अधिक 80 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में 79 मिमी, सहारनपुर शहर में 74 मिमी, बिजनौर के धामपुर में 70 मिमी और लखीमपुर खीरी के निघासन में 65.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। यह बारिश आम जनजीवन को प्रभावित कर सकती है, खासकर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
