27 साल बाद आगरा कोर्ट से चरस आरोपी बरी, गवाही के लिए नहीं पहुंचे पुलिसकर्मी
आगरा की अदालत ने 27 साल पुराने चरस मामले में आरोपी मुन्ना को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला सबूतों के अभाव में सुनाया, क्योंकि मामले की गवाही के लिए कोई भी पुलिसकर्मी 27 साल तक अदालत में पेश नहीं हुआ। इस देरी के कारण न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
मामला 23 अगस्त 1999 का है, जब सदर थाने के उपनिरीक्षक आरके सिसौदिया और एसओजी टीम ने राजपुर चुंगी के पास से मुन्ना को 19 पुड़िया चरस के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि मुन्ना चरस की खरीद-बिक्री करता है।
हालांकि, जब मामला अदालत पहुंचा, तो पुलिस और एसओजी के करीब एक दर्जन गवाहों को गवाही देनी थी। अदालत के बार-बार आदेश के बावजूद, कोई भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस कारण अभियोजन का साक्ष्य का अवसर 10 दिसंबर 2025 को समाप्त कर दिया गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम अनुज कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी के अधिवक्ता अरुण तेहरिया के तर्कों को सुनने और साक्ष्य के अभाव को देखते हुए आरोपी मुन्ना को दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।
