जब NDA में Vajpayee को हटाने की बात चली, तब Mamata Banerjee ने दिया था साथ
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर उनके राजनीतिक जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला गया है। यह घटना 1999 की है, जब वाजपेयी सरकार एक वोट से गिर गई थी। उस समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर कुछ सदस्यों ने वाजपेयी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और उन्हें हटाकर वैकल्पिक सरकार बनाने की बात चल रही थी।
पूर्व प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन ने अपनी नई किताब ‘अटल संस्मरण’ में खुलासा किया है कि उस नाजुक दौर में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने वाजपेयी का दृढ़ता से समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अगर वाजपेयी नहीं होंगे, तो NDA की कोई वैकल्पिक सरकार नहीं बनेगी। ममता बनर्जी के साथ-साथ बीजू जनता दल (BJD) के नवीन पटनायक और एमडीएमके (MDMK) के वाइको ने भी वाजपेयी के पक्ष में मजबूत रुख अपनाया था।
ममता बनर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच का यह रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि व्यक्तिगत भी था। 6 जुलाई 2000 को वाजपेयी ने कोलकाता में ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर का दौरा किया था। वहां उन्होंने ममता की मां गायत्री देवी के पैर छुए थे। गायत्री देवी ने वाजपेयी को गुलाब और रेशमी स्कार्फ भेंट किया था। यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच के गहरे भरोसे और सम्मान को दर्शाती है।
वाजपेयी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 1996 में वह पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही चल पाई थी। बहुमत साबित न कर पाने पर उन्होंने सदन के पटल पर इस्तीफा दे दिया था। 1998 में, विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करके उन्होंने फिर से सरकार बनाई, जो 1999 में एक वोट से गिर गई। हालांकि, 1999 के चुनावों में NDA ने फिर से जीत हासिल की और वाजपेयी पूर्ण कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बने।
