केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में दूसरी सीटी स्कैन मशीन का इंतजार, 3 साल बाद भी अधूरी योजना
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को बेहतर जांच सुविधा देने की योजना तीन साल बाद भी अधूरी है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर में दूसरी सीटी स्कैन मशीन लगाने का फैसला किया गया था, लेकिन अभी तक मशीन नहीं लग सकी है। ऐसे में प्रतिदिन 150 से अधिक मरीजों का सीटी स्कैन एक ही पुरानी मशीन के भरोसे हो रहा है। ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं और प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। प्रदेश भर से सिर में चोट लगे मरीज भी यहां पहुंचते हैं, जिनमें समय पर सीटी स्कैन जांच बेहद अहम होती है। सिर की चोट, सड़क हादसे, ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों में रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर इलाज की दिशा तय करते हैं।
पुरानी मशीन में आए दिन खराबी आने से मरीजों और तीमारदारों को जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों की सुविधा के लिए करीब तीन साल पहले दो सीटी स्कैन मशीनों के संचालन की योजना बनाई गई थी। इसके लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए टेंडर भी किया गया, लेकिन इसके बाद भी दूसरी मशीन स्थापित नहीं हो सकी। सरकार ने मशीनों के लिए अलग से केजीएमयू को 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, फिर भी हालात बदतर हैं।
इस देरी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है, जहां गंभीर मामलों में कीमती समय बर्बाद हो रहा है। इसके अलावा, ट्रॉमा सेंटर की एक्सरे मशीन भी काफी पुरानी हो चुकी है। एक्सरे जांच की संख्या अधिक होने और मशीन पुरानी होने से दबाव बढ़ रहा है। एक और नई एक्सरे मशीन लगाने की योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। तीमारदारों का कहना है कि ट्रॉमा जैसे संवेदनशील विभाग में जांच उपकरणों की कमी मरीजों के इलाज में देरी का कारण बन सकती है। जिम्मेदारों का कहना है कि मशीनों की व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया चल रही है। अब सवाल यह है कि तीन साल से अटकी दूसरी सीटी स्कैन मशीन कब तक मरीजों को राहत दे पाएगी।
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