हाथरस हादसे के बाद चर्चा में आए भोले बाबा की जीवनशैली और विवादित यात्रा | hathras stampede
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में आयोजित एक सत्संग के दौरान कुप्रबंधन के चलते मची भीषण भगदड़ में 121 बेकसूर लोगों की जान चली गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद मुख्य आयोजनकर्ता और बाबा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है।
हाथरस की इस त्रासदी के बाद आगरा के केदार नगर स्थित उस मकान पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जहां कभी भोले बाबा निवास करते थे। कभी पुलिस विभाग में सिपाही रहे सूरजपाल ने नब्बे के दशक के अंत में नौकरी छोड़कर धार्मिक प्रवचन देना शुरू किया था। आज स्थिति यह है कि उनके अनुयायी इस पुराने मकान की चौखट पर सिर माथा टेकते हैं और इसे किसी मंदिर की तरह पूजते हैं। स्थानीय भक्तों का दावा है कि बाबा पहले थाली में बैठकर दूध से स्नान किया करते थे, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
इस बीच राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इस त्रासदी के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। इतने बड़े पैमाने पर जुटाई गई भीड़ के प्रबंधन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह हादसा हुआ, जिसने एक बार फिर अंधविश्वास और भीड़ तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
