आगरा में हरे पेड़ काटने पर बवाल, CEC ने ADA को लगाई फटकार; अब खुद करेगी मौके का निरीक्षण
आगरा विकास प्राधिकरण का रायपुर रहनकला में प्रस्तावित आवासीय योजना की जमीन पर हरे पेड़ काटने के मामले में शुक्रवार को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) बैठक में सुनवाई हुई। आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली सीईसी के समक्ष पेश हुईं और उन्होंने अपना पक्ष रखा लेकिन सीईसी के चेयरमैन सिद्धांत दास एडीए पक्ष के संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा है कि सीईसी मौके पर निरीक्षण करेगी उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आगरा विकास प्राधिकरण रायपुर रहनकला में करीब 446 हेक्टेयर भूमि पर 10 टाउनशिप बसाने जा रहा है। इसके लिए किसानों को मुआवजा वितरण जमीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया जारी है।
आरोप है कि कब्जा लेने के दौरान आगरा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने वहां लगे हरे पेड़ों को बुलडोजर की मदद से उखाड़ दिया। मामला सुर्खियों में आया तो वन विभाग ने एक बुलडोजर चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसकी शिकायत अधिवक्ता अपूर्व शर्मा ने सीईसी में की थी। पांच दिसंबर को सीईसी ने इस मामले की सुनवाई की थी और सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए एडीए उपाध्यक्ष को तलब किया था। शुक्रवार को एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली सीईसी के समक्ष हाजिर हुईं और उन्होंने कहा कि पेड़ एडीए ने नहीं बल्कि किसानों ने काटे हैं। इस पर शिकायतकर्ता ने कहा कि जब पेड़ किसानों ने काटे हैं तो फिर एडीए बुलडोजर चालक के खिलाफ मुकदमा क्यों किया गया है।
इस मामले को लेकर लंबी बहस चली लेकिन सीईसी के चेयरमैन एडीए की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सीईसी कमेटी मौके पर आकर जांच करेगी। इसी तरह आगरा कॉलेज के प्राचार्य आवास परिसर के आसपास खाली जमीन पर पेड़ काटने और खनन के मामले पर भी सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन आगरा कॉलेज के ओर से कोई हाजिर नहीं हुआ। इस पर भी सीईसी ने मौके पर आकर जांच कराने का निर्देश जारी किया है। इस मामले में भी वन विभाग ने एक मजदूर तोताराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि वहां पेड़ काटे गए हैं और सबूत मिटाने के लिए खनन किया गया है।
