फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया ने KGF और साउथ सिनेमा के हिंसात्मक ट्रेंड पर उठाए सवाल | bollywood news
जाने-माने फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने समकालीन सिनेमा के बदलते स्वरूप और मुख्यधारा की फिल्मों में बढ़ती हिंसा पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में नजर आने वाले लंबे बाल और बड़ी दाढ़ी वाले नायक उन्हें पौराणिक कथाओं के राक्षसों जैसे प्रतीत होते हैं। यह बयान उन्होंने एक साहित्यिक महोत्सव के दौरान दिया, जहां उन्होंने सिनेमा और समाज के बीच के बदलते समीकरणों पर बात की [bollywood news]।
तिग्मांशु धूलिया ने स्पष्ट किया कि बाहुबली, केजीएफ और कांतारा जैसी फिल्मों के बाद से बड़े पर्दे पर खून-खराबे और मार-काट का दौर तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार, समाज के भीतर दबे गुस्से को संतुष्टि इन फिल्मों के जरिए मिल रही है, जिसके चलते दर्शक इन्हें हाथों-हाथ ले रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह का सिनेमा उनकी व्यक्तिगत पसंद के दायरे में बिल्कुल नहीं आता है।
सिनेमा में कहानी कहने के तरीके पर सवाल उठाते हुए निर्देशक ने कहा कि कॉरपोरेट कल्चर और एक जैसे फॉर्मूलों के कारण मौलिकता लगातार घट रही है। उन्होंने पुराने दौर के फिल्मकारों को याद करते हुए कहा कि 2017 के बाद हिंदी सिनेमा में कहानी कहने की कला प्रभावित हुई है। इस तरह की तीखी समीक्षा से फिल्म इंडस्ट्री में कंटेंट और कमर्शियल सक्सेस को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में फिल्मों की कहानी पर पड़ सकता है।
