लखनऊ में पुराने इलाकों की तंग गलियों के नीचे दौड़ेगी मेट्रो, बनेंगे सात भूमिगत स्टेशन | lucknow news
उत्तर प्रदेश की राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के लिए मेट्रो प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण योजना को अंतिम रूप दे दिया है। पुराने लखनऊ की घनी आबादी, तंग गलियों और व्यस्त बाजारों के बीच अब भूमिगत मेट्रो चलाने की राह साफ हो गई है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के इस नए चरण के तहत चारबाग से बसंतकुंज तक का मार्ग तय किया गया है [lucknow news]।
यह पूरा कॉरिडोर करीब ग्यारह किलोमीटर से अधिक लंबा होगा। इसमें से एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे यानी भूमिगत होगा, जबकि शेष भाग एलिवेटेड बनाया जाएगा। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संकरे बाजारों और पुरानी बसाहट वाले क्षेत्रों में सड़क पर यातायात बाधित किए बिना मेट्रो का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। चारबाग को एक प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन में जाने में आसानी होगी।
परियोजना के तहत बनने वाले भूमिगत खंड में कुल सात स्टेशन होंगे, जबकि एलिवेटेड हिस्से में पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। इस नए नेटवर्क के जुड़ने से पुराने शहर के निवासियों को आधुनिक और तेज रफ्तार परिवहन का लाभ मिलेगा। साथ ही, सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने से आम जनता को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। संबंधित विभागों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि विकास कार्यों का लाभ जल्द से जल्द नागरिकों तक पहुंच सके।
