मायावती ने 58 हजार पंचायत सहायकों के आंदोलन का किया समर्थन, सरकार से की यह बड़ी मांग | up politics news
उत्तर प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे पंचायत सहायकों को अब राजनीतिक गलियारों से बड़ा समर्थन मिलने लगा है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ के इको गार्डन में धरना दे रहे लगभग 58 हजार पंचायत सहायकों के पक्ष में आवाज उठाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार को इनकी मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए [up politics news]।
राजधानी के इको गार्डन में पिछले कई दिनों से विभिन्न जिलों के पंचायत सहायक डेरा डाले हुए हैं। इन कर्मचारियों का मुख्य दर्द यह है कि ग्राम पंचायत स्तर पर ऑनलाइन और तमाम प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के एवज में उन्हें मात्र छह हजार रुपये प्रतिमाह का मामूली मानदेय दिया जाता है। प्रदर्शनकारी पंचायत सहायकों ने पांच सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है, जिसमें मुख्य रूप से मानदेय बढ़ाकर 18 से 25 हजार रुपये करने, संविदा व्यवस्था खत्म कर नियमित करने, महिला कर्मियों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी बनाने और वीडीओ तथा वीपीओ भर्तियों में प्राथमिकता देने की मांग शामिल है। इस आंदोलन के माध्यम से युवा कर्मचारी अपने भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगा रहे हैं।
लोक कल्याणकारी नीतियों और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन कर्मचारियों का असंतोष ग्रामीण विकास कार्यों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में एक प्रमुख राजनीतिक दल द्वारा समर्थन मिलने के बाद अब राज्य सरकार पर इन मांगों के समाधान का दबाव और अधिक बढ़ गया है।
